चलो आज फिर ये जहाँ बाँट लेते हैं,
कुछ अच्छा और कुछ बुरा बाँट लेते हैं,
थोड़ी सी हंसी बाँट लेते हैं,
थोड़ी सी खुशी बाँट लेते हैं,
चलो अपने ये सपने बाँट लेते हैं,
और चाहो तो ये अपने भी बाँट लेते हैं,
ख्यालो की सादगी बाँट लेते हैं,
दोस्तों की बन्दिगी बाँट लेते हैं,
चलो कुछ कल बाँट लेते हैं,
और कुछ आज अभी बाँट लेते हैं,
चलो आज फिर ये जहाँ बाँट लेते हैं|
तुमसे ज्यादा परेशान है तुम्हारा वो
पुराना दोस्त,
चलो आज उसकी परेशानी बाँट लेते हैं|
थोडा सा आकाश बाँट लेते हैं,
थोड़ी सी जमी बाँट लेते हैं,
थोड़ी सी आँखों की नमी बाँट लेते हैं,
थोड़ी सी ये बारिश बाँट लेते हैं,
और बारिश की ये पहली बूंद बाँट लेते
हैं,
चलो फिर से ये जहाँ बाँट लेते हैं|
रातो का घना अँधेरा बाँट लेते हैं,
सूरज की रोशनी तो पहले ही मशगूल है
कहीं,
चलो आज ये सवेरा बाँट लेते हैं,
चलो खोजते है कि कोई नाखुश है क्या
मेरे दोस्त?
और फिर उसकी नाखुशी बाँट लेते हैं,
या उसकी बेरुखी बाँट लेते हैं,
अगर परेशान है अब भी वो तुम्हारा
पुराना दोस्त !!
तो उसकी फिर से उसकी परेशानी बाँट लेते
हैं,
चलो आज ये जहाँ बाँट लेते हैं,
कुछ आज और कुछ अभी बाँट लेते हैं|
Aditya 'Again'
No comments:
Post a Comment