Monday, 2 March 2015

मेरे चले जाने के बाद उसने खिड़की तो जरुर खोली होगी....

मेरे चले जाने के बाद उसने खिड़की तो जरुर खोली होगी,
और ढूंढा होगा बेचैन नजरो से उस मोड़ तक,
जिस मोड़ तक उसकी नज़रे गई होंगी |

जैसे मुड़ के देखा था मैंने कई बार,
उसने भी नज़रे कई बार दौड़ाई होगी
घूमी होगी वो खिड़की से जिस पल,
उसकी रूह भी उस पल जुरूर रोई होगी |

इस बात पे तो तुमसे शर्त भी लगा लू मैं,
कि उसने फिर खिड़की बहुत जोरो से बंद की होगी,
उसे भी याद न रहा होगा वो मंजर,
जिस पल वो बिस्तर पे यूं ही गिरी होगी |

वो न उठी होगी बिस्तर से लिपटकर तब तक,
जब तक कि उसको किसी ने बाहर से आवाज न दी होगी,
बहाना उसने भी जुरूर बनाया होगा उसके सर दर्द का,
जब उससे एक गिलास पानी की फरमाईश किसी ने की होगी |

फिर उसने सम्भाला होगा खुद को मुश्किल से,
और नज़रे उसने सबसे जुरुर छुपाई होंगी ,
मशगूल रहा होगा उसका दिलो- दिमाग मुझमे शायद ,
ठोकर से, उसने जो कोई चीज गिराई होगी |

दी होगी संभल कर चलने की हिदायत उसकी माँ ने जुरुर उसे
मेरी तरह कहूँ या उसकी तरह ऐ मेरे दोस्त
ताउम्र उसने फिर शायद कभी गलती ऐसी न दोहराई होगी..


                             Aditya  'Again'

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