ये जो तुम आज थोड़ा बदले से हो....
ये जो तुम आज थोड़ा बदले से हो !
थोड़े बहके से हो
और थोड़े चहके से हो !
कोई तो राज छुपा रखा है
इन आँखों में तुमने
नही तो फिर तुम क्यू सहमे से हो ?
और गुम से हो तुम कहीं
या फिर कहीं खोये से हो ?
कोई अंजाम बना रखा है
अपने दिल के किसी कोने में
नहीं तो फिर क्यू लगता है कि
तुम सोये से हो ?
तुम्हारी शिकायत है कि मैं
खुद की बात नहीं करता,
तुम ये बखूबी जानते हो कि,
मै क्या हूँ, कुछ भी तो नहीं हूँ!!!!!
फिर
क्यू बस गए हो किसी के करीब इतना
कि लगता है कभी कि,
तुम कोई सपने से हो
या फिर कोई अपने से हो ?
Aditya 'Again'