Sunday, 3 May 2015

या फिर मेरे मौला ये कर दे.....


मेरे मौला
तू बस इतना तो कर दे,
इस जहाँ को फिर से जहाँ था वहाँ कर दे.....

मेरे मौला अब थोडा रहम कर दे,
थोड़ी खुशी और थोडा करम कर दे,
शुकून फैला दे उनके दर पे थोडा,
अब अपना रुख थोडा नरम कर दे..
या फिर मेरे मौला ये कर दे
तू छीन ले मुझसे मेरे हिस्से की खुशी, पर
ये जिंदगी जहाँ थी फिर से वहीँ कर दे..

ये माना कि गलतियाँ हमने भी की,
और फिर दोहराई भी, तेरी हदों तक,
तू तो तुझसे है और हम भी तुझसे है
ये खुशियों की थाली थोड़ी तो गरम कर दे..
या फिर मेरे मौला ये कर दे
थोडा दर्द मुझमे भी बाँट दे तू बेधड़क,
और मेरी खुशियों में उनका भी नाम कर दे..

कहूँ ये की तू बुरा है कि बुरे हैं हम
पर फैला मातम जो गर है इस कदर
गुजारिश है तुझसे कि, ये जो चादर है तेरे रहमोकरम की,
उसका कोई तो कोना तो इधर कर दे.
या फिर मेरे मौला ये कर दे
तू मौत से कह दे कि ज़रा रुक जाये
और तू आँखों पे उसकी थोड़ी सी शरम कर दे..
मेरे मौला....
                           --  Aditya